Home विशेषज्ञ राय कितना धोखा खाएं! मुस्लिम वोटर का दर्द

कितना धोखा खाएं! मुस्लिम वोटर का दर्द

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हिंदुस्तान की आज़ादी को 70 साल पूरे होने जा रहे हैं लेकिन आज भी हिंदुस्तान के मुसलानों को वो इज़्ज़त नहीं मिल सकी जिसकी उम्मीद में उनके पुर्खे देश की मोहब्बत में अपनी मिट्टी को छोड़ कर पाकिस्तान नहीं गए थे!

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आज़ादी के बाद से कांग्रेस पार्टी सेकुलरिज्म के नाम पर मुसलमानों का बेवकूफ़ बनाती रही! हमेशा संघी विचारधारा का डर दिखाकर कांग्रेस मुसलमानों के वोट पर क़ब्ज़ा जमाये रखी! लेकिन साथ ही साथ कभी मुसलमानों को उस पसमांदगी से उभरने भी नहीं दिया! कभी रंगनाथ मिश्रा कमीशन तो कभी सच्चर कमिटी के नाम पर मुसलमानों को हमदर्दी का मरहम लगाया गया लेकिन ज़ख्म का इलाज नहीं किया गया!

सिर्फ इतना ही होता तो भी काफी था खुद तो इस बात है कि समाजवाद का नगाड़ा पीटने वाले मुल्ला मुलायम सिंह यादव ने भी कांग्रेस के नक़्शे क़दम पर ही काम किया! 1992 में बाबरी मस्जिद की शहादत को मुलायम सिंह यादव ने अपनी राजनीतिक खेती की जड़ बना लिया! कभी टोपी पहन कर मुसलमानों को टोपी पहनाई तो कभी लाल सफ़ेद रुमाल कंधे पर डालकर इफ्तार का सहारा लिया!

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2012 के चुनावी घोषणा पत्र में साफ़ तौर पर ये घोषणा की गयी कि उत्तर प्रदेश में मुसलमानो को जनसँख्या के आधार पर आरक्षण दिया जायेगा! जिसके बाद मुसलमानों ने मुल्ला मुलायम सिंह को दिलो जान से वोट किया और पूर्ण बहुमत की सरकार मुलायम सिंह के क़दमों में लाकर डाल दी! उत्तर प्रदेश में 64 मुस्लिम विधायक जीतकर सदन में पहुंचे जिसमे से 41 समाजवादी पार्टी के थे! लेकिन पिछले 5 साल के कार्यकाल में एक बार भी मुस्लिम आरक्षण की बात नहीं की गयी! सदन में बिल पास करना तो दूर की बात पार्टी के किसी बड़े नेता ने एक बार भी मुस्लिम आरक्षण का ज़िक्र तक अपनी ज़बान पर नहीं लाया!

Mulayam Singh Yadav with Amar Singh

समाजवदी पार्टी ने हमेशा मुस्लिम मौलानाओं से नज़दीकिया भी बरक़रार रखीं लेकिन क़ौम के सभी रहबर सरकार की दावतों में तो बराबर शुमार होते रहे लेकिन किसी ने भी मज़बूती के साथ क़ौम का मुद्दा नहीं उठाया! अगर एक बार भी उठाया होता तो आज मुस्लिम आरक्षण उत्तर प्रदेश में लागु हो गया होता!

22 दिसम्बर से इस सरकार का आखिरी सत्र शुरू होने जा रहा है! अब देखना होगा कि इस बार ये मुद्दा सदन तक पहुँचता है या नहीं…?

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