मिलिए 3 इडियट्स के असली फुंसुख वांगडू से आमिर ने निभाया था...

मिलिए 3 इडियट्स के असली फुंसुख वांगडू से आमिर ने निभाया था इनका रोल !

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आपको आमिर की सुपरहिट फिल्म ‘3 इडियट्स’ तो जरूर याद होगी. इस फिल्म ने ना सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर कई सारे रिकॉर्ड तोड़े थे बल्कि पढ़ाई का एक अलग नजरिया भी लोगों के सामने रखा था. इस फिल्म में आमिर खान, करीना कपूर, आर. माधवन और शरमन जोशी ने कमाल का अभिनय किया था.

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इस फिल्म की कहानी मशहूर लेखक चेतन भगत की किताब ‘फाइव प्वाइंट समवन’ से ली गई थी. इस फिल्म में आमिर ने ‘फुंसुख वांगडू’ का किरदार निभाया था. लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि ये किरदार कोई काल्पनिक किरदार नहीं बल्कि लद्दाख के इंजीनियर सोनम वांगचुक से प्रेरित था.

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कौन हैं सोनम वांगचुक
सोनम वांगचुक भले ही एक छोटी से जगह में रहते हो, लेकिन उन्होंने अपनी इंजीनियरिंग से दुनिया को हैरान कर दिया. वांगचुक बर्फ के स्तूप बनाकर पश्चिमी हिमालय के उन इलाकों में खेती के नए तरीके इजाद करने की कोशिश कर रहे हैं, जो पानी की कमी से जूझ रहे हैं. लद्दाख में अक्सर अप्रैल और मई के महीनों में पानी की समस्या देखी जाती है साथ ही इस मौसम को खेती के लिए सही माना जाता है, ऐसे में किसानों की मदद के लिए वांगचुक ने खेती के नए तरीके ईजाद किए हैं.

soanm wang

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क्या कर रहे हैं वांगचुक
फिल्म में दिखाया गया था कि आमिर उन बच्चों को काबिल बनाते हैंं, जो स्कूल नहीं जाते हैं, यही काम वांगचुक असल जिंदगी में करते हैं. वो शिक्षा और पर्यावरण को ध्यान में रखकर पिछले 20 सालों से काम कर रहे हैं और साथ ही उन्होंने इस मुहिम को आगे ले जाने के लिए एजुकेशनल ऐंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख (SECMOL) नाम का संगठन बनाया है.

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इसलिए मिला सोनम वांगचुक को अवॉर्ड
वांगचुक को हाल ही में फेमस ‘रोलेक्स अवॉर्ड फॉर एंटरप्राइज’ 2016 दिया गया है. सोनम वांगचुक कई समस्याओं के बावजूद लोगों की भलाई और शिक्षा के लिए लगातार काम कर रहे हैं. वह आधुनिक शिक्षा का मॉडल रखने की लगातार कोशिश कर रहे हैं और काफी हद तक इसमें सफल भी हुए हैं.

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उन्हीं का आइडिया है ‘थ्री इडीयट्स’ वाला स्कूल
वागंचुक ने जम्मू-कश्मीर सरकार के साथ मिलकर लद्दाख के स्कूलों में पढ़ाई पर जोर देते हैं, साथ ही स्थानीय भाषा का प्रयोग करते हैं ताकि बच्चों को समझने में आसानी हो. 1994 में उन्होंने स्कूलोंं से बाहर कर दिए गए कुछ स्टूडेंट्स को इकट्ठा करके 1,000 युवाओं का संगठन बनाया औऱ इन्हींं की मदद से वागंचुक ने ऐसा स्कूल बनाया, जो स्टूडेंट्स द्वारा ही चलाया जाता है और पूरी तरह सौर ऊर्जा से युक्त है…

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