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मुस्लिम लड़कियों को लड़कों के साथ तैरना ही होगा; मानव अधिकार कोर्ट ने सुनाया फ़ैसला

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स्विट्जरलैंड के को-एजुकेशन स्कूलों में मुस्लिम लड़कियों को लड़कों के साथ स्विमिंग क्लास में छूट नहीं मिलेगी। यूरोपियन मानव अधिकार कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा कि मुस्लिम लड़कियों को लड़कों के साथ स्विमिंग क्लास लेनी ही पड़ेगी। स्विट्जरलैंड के मुस्लिम दंपती ने यूरोपियन कोर्ट और ह्यूमन राइट्स (ECHR) में लड़कियों को लड़कों के साथ तैराकी न कराने को लेकर केस दाखिल किया था।

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मंगलवार को स्ट्रॉसबर्ग ने एक मुस्लिम अभिभावक द्वारा दाखिल की गई याचिका पर फैसला सुनाया जो चाहते थे कि उनकी दो बेटियां लड़कों के साथ स्विमिंग क्लास से बाहर रहें। अभिभावक ने कहा कि इससे उनकी धार्मिक स्वतंत्रता का हनन होता है। इस पर कोर्ट ने कहा कि इससे किसी की धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन नहीं होता है। ECHR ने निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया जिसमें कहा गया था कि सभी बच्चों के लिए स्विमिंग सीखना बहुत जरूरी है।

कोर्ट ने अभिभावक पर 1400 फ्रैंक (लगभग 94,000 रुपये) का जुर्माना भी लगाया और निर्देश दिया कि वह अपने बच्चों को स्विमिंग करने के लिए अनिवार्य रूप से भेजेंगे। कोर्ट ने कहा कि सामाजिक एकीकरण के लिए ऐसा करना जरूरी है। स्विट्जरलैंड के बासल और कई अन्य शहरों में स्विमिंग सीखना अनिवार्य है।

शिक्षा अधिकारियों ने इस मामले पर कहा कि केवल उन्हीं लड़कियों को छूट मिलती है जो परिपक्वता की उम्र तक पहुंच जाती हैं और जिस दंपती ने यह केस दायर किया था उनकी बेटिंयां अभी इस उम्र तक नहीं पहुंची हैं। कोर्ट ने कहा कि स्विट्जरलैंड अपनी परंपरा और जरूरतों के हिसाब से अपना पाठ्यक्रम तैयार करने को स्वतंत्र है।

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